20 सितंबर 2026
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राधा अष्टमी 2026: क्या 1:28 पर व्रत खोलें? जानें पूजा का सही समय और नियम

20 सितंबर 2026 · 1 बार पढ़ा गया ·1 मिनट पढ़ें

राधा अष्टमी 2026 पर व्रत और पूजा के समय को लेकर श्रद्धालुओं में भ्रम है, जानें मध्याह्न पूजा का सही मुहूर्त और पारण के नियम।

राधा अष्टमी 2026: क्या 1:28 पर व्रत खोलें? जानें पूजा का सही समय और नियम

राधा अष्टमी 2026: क्या 1:28 पर व्रत खोलें? जानें पूजा का सही समय और नियम

राधा अष्टमी का पावन पर्व, जो राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है। साल 2026 में यह तिथि 19 सितंबर को पड़ रही है। इस दिन राधा रानी की पूजा और व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन इस बार कई श्रद्धालुओं के मन में पूजा के समय और व्रत खोलने को लेकर संशय बना हुआ है।

अक्सर देखा गया है कि अष्टमी तिथि के समापन और पूजा के मध्याह्न मुहूर्त को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है। इस दुविधा को दूर करने के लिए आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार राधा अष्टमी 2026 के लिए सही पूजा विधि और व्रत के नियम।

उस रोज़ पूजा का सही मुहूर्त क्या है?

पंचांग के अनुसार, 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में राधा रानी की मध्याह्न पूजा का शुभ समय सुबह 11 बजकर 01 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। यह अवधि राधा रानी के विशेष पूजन के लिए सबसे उत्तम मानी गई है। इस दौरान भक्तगण राधा रानी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

अष्टमी तिथि का प्रारंभ 18 सितंबर 2026 को रात 10 बजकर 53 मिनट पर होगा और इसका समापन 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा। यह तिथि सूर्योदय से लेकर दोपहर तक प्रभावी रहेगी, जिससे दिन भर व्रत का पालन किया जा सकेगा।

क्या 1:28 पर ही व्रत खोलना चाहिए?

आप सोच रहे होंगे कि जब मध्याह्न पूजा 1:28 पर समाप्त हो रही है, तो क्या व्रत भी उसी समय खोलना उचित है? नहीं, ऐसा नहीं है। राधा अष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि के समापन के बाद ही खोला जाता है। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का समापन 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगा।

इसलिए, श्रद्धालुओं को अपना व्रत 3 बजकर 26 मिनट के बाद ही खोलना चाहिए। कुछ भक्त अगले दिन नवमी तिथि में भी व्रत का पारण करते हैं, जो कि एक मान्य परंपरा है। व्रत खोलने से पहले राधा रानी का स्मरण कर प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

मुख्य बातें एक नज़र में

  • राधा अष्टमी 2026: 19 सितंबर को मनाई जाएगी।
  • मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक।
  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर 2026, रात 10:53 बजे।
  • अष्टमी तिथि समापन: 19 सितंबर 2026, दोपहर 3:26 बजे।
  • व्रत पारण का सही समय: 19 सितंबर 2026, दोपहर 3:26 बजे के बाद।
  • राधा रानी का जन्मोत्सव: भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाया जाता है।
  • पूजा विधि: विधिवत पूजन, भोग और आरती का विधान।

इस व्रत का महत्व और परंपरा

राधा अष्टमी का व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राधा रानी की सच्चे मन से आराधना करने पर भगवान कृष्ण भी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कई महिलाएं यह व्रत संतान प्राप्ति और परिवार के कल्याण के लिए भी रखती हैं।

इस दिन मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जहां राधा कृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। भक्तगण इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य भी करते हैं, जिससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष

राधा अष्टमी 2026 का पर्व श्रद्धा और भक्ति का संदेश लेकर आएगा। श्रद्धालुओं को पूजा के सही मुहूर्त और व्रत पारण के नियमों का पालन करते हुए राधा रानी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। सही समय पर पूजा और व्रत का समापन करने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। यह दिन राधा रानी के प्रति हमारी अटूट आस्था और प्रेम को समर्पित है, जो हमें जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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